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एक कमरे में 5 किरदारों की मुंबइया लाइफ

एक कमरे में 5 किरदारों की मुंबइया लाइफ

नाटक – ये है बॉम्बे मेरी जान
निर्देशन – नादिरा ज़हीर बब्बर
इफ्तेखार नाट्य समारोह
भारत भवन, भोपाल

मुंबई यानी सपनों का शहर। यहां देशभर से आए लोग सपने संजोए किन परिस्थितियों में रहते हैं, इसे दिखाती है नादिरा जहीर बब्बर की कहानी “ये है बॉम्बे मेरी जान’। भारत भवन में इफ्तेखार नाट्य एवं सम्मान समारोह के अंतिम दिन इसे मंचित किया गया। इसका निर्देशन भी नादिरा ने ही किया। रियलिस्टिक सेट, सधी हुई एक्टिंग काफी प्रभावित करती है। एक कमरे में जमे सभी किरदार अपनी परिस्थिति से कभी हंसाते हैं तो कभी गमगीन भी करते हैं। कहानी है देश के अलग-अलग कोनों से मुंबई आए देवी दा, तिकम, राजन, लक्ष्मी और आरिफ अली की। ये एक ही कमरे को शेयर करते हैं। अपनी पहचान बनाने के लिए कोई स्क्रिप्ट राइटर बनने के ख्वाब देखता है, तो कोई एक्टर, लेकिन सपनों की राह आसान नहीं। संघर्ष करते हुए सभी एक दूसरे के करीब आ जाते हैं और बहुत गहरे दोस्त बन जाते हैं।

दर्शकों के सामने आया मुंबई का मन
नाटक में मुंबई में रहने वाले लोगों के मनोभाव को दिखाया गया है। कैथोलिक मकान मालकिन जो अपने शराबी और गाली गलौच करने वाले पति के साथ रहती है, उसने एक बिहारी, एक साउथ इंडियन, एक हरियाणवी, एक मुस्लिम को अपना घर किराए पर दे रखा है। सभी प्यार और शांति से रहते हैं। साउथ इंडियन राजन चाय पूछने पर अपमानित महसूस करता है, क्योंकि वह केवल कॉफी पीता है। तो आरिफ को पुलिस पूछताछ के लिए बुलाती रहती है। ऐसे कुछ दृश्य मुम्बई का मन बताने में सफल साबित हुए।

नाटक में कलाकारों की बेहतरीन अदाकारी और सधे हुए संवादों ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया।

  • सिटी भास्कर

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