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शोरगुल

शोरगुल
कलाकार – जिम्मी शेरगिल, आशुतोष राणा, सुहा गोजेन, संजय सूरी, हितेन तेजवानी, एजाज खान
निर्देशक – प्रणव कुमार सिंह, जितेंद्र तिवारी

 

पिछले हफ्ते रिलीज होने वाली यह फिल्म ऐन वक्त पर एक हफ्ते के लिए आगे इस वजह से टली कि यूपी के कई सिनेमाघरों ने फिल्म को अपने यहां लगाने से इनकार कर दिया था। कहा जा रहा था कि फिल्म में हिंदु-मुस्लिम दंगों के सीन की भरमार है और साथ कहानी के किरदारों का नाम यूपी सरकार के नेताओं से मिलते-जुलते हैं। इस फिल्म में प्रदेश के सीएम का नाम मिथिलेश आपको यूपी के सीएम की याद दिलाएगा तो फिल्म में होम मिनिस्टर बने आलम खान का नाम भी आपको यूपी के बड़े नेता की याद दिलाता है। ऐसा लगता है कि सेंसर बोर्ड इस बार फिल्म पर न जाने क्यों कुछ ज्यादा मेहरबान रहा तभी तो फिल्म में कई भड़काऊ संवादों को पास किया गया तो दंगों के कई सीन भयानक होने के बावजूद सेंसर ने पास किए।

कहानी : मलिहाबाद के एक गांव में चौधरी (आशुतोष राणा) किसानों का नेता है। चौधरी गांव वालों का सच्चा हितैषी है और उनके साथ भूमि अधिग्रहण कानून का विरोध करने के लिए धरना प्रदर्शन करता है। चौधरी क्षेत्र के दबंग विधायक रंजीत ओम भैया (जिम्मी शेरगिल) की धार्मिक कट्टरवादिता का घोर विरोधी है। चौधरी उस वक्त रंजीत ओम के खिलाफ खूलकर सामने आता है जब वह एक मुसलमान किसान के खेत की जमीन पर देवी मां का विशाल मंदिर बनवाना चाहता है। किसान के खेत से देवी की मूर्ति निकलने की वजह से रंजीत ओम और उसके सर्मथक चाहते है कि वहां मंदिर बनाया जाए और इसके लिए मुस्लिम किसान खेत की जगह मुफ्त में मंदिर कमिटी को दे। चौधरी के हस्तक्षेप के बाद रंजीत ओम को जमीन के एवज में आठ लाख रूपये किसान को देने पड़ते हैं।

चौधरी का इकलौता बेटा रघु (अनिरुध दवे) पड़ोस में रहने वाली मुस्लिम लड़की जैनब (सुहा गोजेन) बचपन से दोस्त होते हैं, दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। कुछ दिनों बाद जैनब का निकाह सलीम (हितेन तेजवानी) के साथ तय हो जाता है। सलीम का भाई मुस्तकीन (एजाज खान) कट्टरवादी अलगाववादी विचारधारा का है। मुस्तकीन भी उसी कॉलेज में पढ़ता है, जहां रघु और जैनब पढ़ते हैं। मुस्तकीन को शक है कि जैनब और रघु एक-दूसरे का प्यार करते हैं। मुस्तकीन को यह सहन नहीं और वह एक दिन रघु की हत्या करके उसकी लाश पुल से पानी में फेंक देता है। बस फिर क्या, विरोधी पार्टियों के साथ विधायक रंजीत ओम इस हत्याकांड को एक मुस्लिम लड़की की वजह से हिंदू लड़के की मौत का रंग देकर पेश करते हैं। इसके बाद पूरा मलिहाबाद हिंदू-मुस्लिम दंगों की चपेट में ऐसा आता है जहां हर ओर मौत का तांडव नजर आ रहा है।

ऐक्टिंग : आशुतोष राणा और जिम्मी शेरगिल इन दोनों ने ही अपने दमदार अभिनय के दम पर फिल्म को काफी हद तक संभालने की अच्छी कोशिश की है। किसानों के हितैषी और गांव के चौधरी के किरदार में आशुतोष राणा खूब जमे हैं। लंबे अर्से बाद जिम्मी ने फिल्म में अपनी रोमांटिक सिंपल इमेज से हटकर ऐसे नेता के किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया। मिस टर्की रहीं सुहा गोजेन ने मजहब के नाम पर हुए दंगों में अपना सबकुछ गवां चुकी जैनेब के रोल में अपने सशक्त अभिनय से जान डाल दी है। अन्य किरदारों में हितेन तेजवानी, नरेन्द्र झा अपनी मौजूदगी का एहसास कराने में सफल रहे। स्टेट के चीफ मिनिस्टर मिथिलेश के रोल में कम फुटेज मिलने के बावजूद संजय सूरी ठीकठाक रहे।

निर्देशन : कमजोर और घिसी-पिटी कहानी पर बनी इस फिल्म को निर्देशक जोड़ी प्रणव कुमार और जितेंद्र तिवारी ने ट्रैक पर लाने की कोशिश तो जरूर की, लेकिन फिल्म स्टार्ट करने की जल्दी में स्क्रिप्ट पर ज्यादा काम नहीं किया गया। दंगों की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की शुरुआत इतनी धीमी है कि दर्शक कहानी के साथ कहीं बंध नहीं पाते। फिल्म में आलम खान बने मिनिस्टर के भाषण बेहद भडकाऊ हैं जो धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। इंटरवल के बाद दंगों के सीन की भरमार है, चारों ओर फैली लाशों के बीच जैनम के विलाप का सीन खूब बन पड़ा है, लेकिन डायरेक्टर जोड़ी क्लाइमैक्स में इस तरह भटक गए कि बरसों पुराने और दर्जनों फिल्मों में पहले से देखे जा चुके सीन के साथ फिल्म का द एंड करके अपनी जान छुड़ाई।

संगीत : एक्स कैबिनेट मिनिस्टर कपिल सिब्बल ने फिल्म के गाने लिखे हैं, जो फिल्म के गाने सब्जेक्ट और फिल्म के माहौल पर फिट बैठते हैं। ललित पंडित का संगीत बेशक किसी म्यूजिक चार्ट में जगह न बना पाए, लेकिन दंगों की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में इन गानों का निर्देशक जोड़ी ने सही इस्तेमाल किया है।

क्यों देखें : अगर आपको पॉलिटिकल बैकग्राउंड पर बनी फिल्में पसंद हैं और आप आशुतोष राणा, जिम्मी शेरगिल के फैन हैं तो इस फिल्म को टाइमपास फिल्म मानकर देख सकते हैं। अगर कुछ नया देखने की चाह में थिऐटर जाएंगे तो अपसेट हो सकते हैं।

 

chandermohan.sharma@timesgroup.com
नवभारत टाइम्स

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