Share This Post

अदम्य साहस और त्याग की कहानी -दीपदान

अदम्य साहस और त्याग की कहानी -दीपदान

नाटक ‘दीपदान’ चित्तौड़ की एक वीरांगना ‘पन्ना धाय’ के अदम्य साहस और त्याग की कहानी है।

भारतीय इतिहास में पन्ना धाय का नाम मातृत्व, वात्सल्य, करुणा, साहस एवं बलिदान का शाश्वत प्रतीक है। मेवाड़ राजसिंहासन के उत्तराधिकारी कुँवर उदयसिंह को बनवीर से बचाने के लिए पन्ना धाय जो रास्ता निकालती है, वह अद्वितीय है।

कुँवर उदय की रक्षा के लिए पन्ना अपने ही पुत्र को कुँवर के स्थान पर सुला देती है और कुँवर के खून का प्यासा बनबीर पन्ना के पुत्र चन्दन को कुँवर समझ कर उसकी हत्या कर देता है।

पन्ना के इसी त्याग और साहस को नाटक “दीप दान” के जरिये मंचित किया गया भोपाल के शहीद भवन में। जिसका निर्देशन नीति श्रीवास्तव ने किया। नाटक में संगीत पुनीत वर्मा का था।

‘दीपदान’ डॉ.रामकुमार वर्मा’ द्वारा रचित एकांकी है। डॉ.रामकुमार वर्मा जिन्होंने नाट्य कला के विकास की संभावनाओं के नए पाट खोलते हुए नाट्य साहित्य को जन जीवन के निकट पहुँचा दिया। अगर ऐसी रचना को कोई सलीके का निर्देशक मिल जाये तो नाटक देखना वाकई एक अद्भुत अनुभव हो जाता है।

deep-daanनाटक में अधिकांश कलाकार पहली बार किसी मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे। पर उनके हाव-भाव, उनकी संवाद अदायगी आदि में उनकी मेहनत और लगन साफ़ दिख रही थी। पन्ना धाय की भूमिका में सौम्या श्रीवास्तव ने बेहतरीन प्रस्तुति दी। एक दृश्य जिसमे पन्ना धाय कुँवर के स्थान पर अपने पुत्र को बलिदान करने का निर्णय लिया था, वहाँ सौम्या ने पन्ना धाय के ह्रदय के भीतर के द्वंद को मंच पर जीवंत कर दिया। बलबीर के रूप में अश्विन यादव को मिले एक दृश्य में भी उसने अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करायी।

और इन दृश्यों को प्रभावी बनाने में पुनीत वर्मा का संगीत भी खास रहा।

मंच सज्जा /सेट पर कुछ और काम किया जा सकता था।

Photo Courtesy – People Samachar

Lost Password

Register