फिल्म समीक्षा

एक म्यूज़िकल स्केच है – जग्गा जासूस

एक गाँव का ,लकड़ी से बने घर का हॉस्पिटल और हॉस्टल के बीच गुजरी दुनिया का जिसमे अपना वज़ूद तलाशता अधूरा बच्चा है बोलने वाली इस दुनिया में वो अधूरा है क्यूंकि दुनिया की तरह नहीं बोल पाता। हॉस्पिटल में दया से उपजे स्नेह की कमी नहीं है पर बचपन को बैठकर सुनने का वक़्त किसी के पास नहीं है इसलिए वे कहना छोड़ देता है सुनने का वक़्त सिर्फ अपनों के पास होता है। इत्तेफ़ाक़ का एक रेड सर्कल है ,एक दायरा जो उसके आस पास खिंचता है उसमे मिला एक अजनबी उसे बैठकर सुनता है ,सुनने से उसमे हौसला जगता है कहने का। उसकी लड़ाई लफ्ज़ो से है वो अपनी लड़ाई लड़ना सीख गया है ,कहना सीख गया है ,लोग उसे सुनने लगे है। ज़िंदगी में स्नेह और दया से अलग एक और प्यार होता है बिना शर्त वो उसे पहचानने लगा है पर इत्तेफ़ाक़ के सर्कल की एक लिमिट है वो जल्दी पूरा होता है ,कभी कभी वक़्त से पहले। इस दफे उसकी ज़िंदगी में हॉस्टल है ,छोटे से कसबे में एक हॉस...Read More

फिल्म समीक्षा – उड़ता पंजाब

तमाम विवादो के बाद रिलीज होने वाली ‘उड़ता पंजाब’ को सीधे सीधे ‘शंघाई’ और ‘ओह माय गॉड’ की श्रेणी मे रखा जा सकता है, ट्रीटमेंट की वजह से नहीं, विषय की तरफ अपनी अप्रोच की वजह से। ‘उड़ता पंजाब’ विशेष बन पड़ी है, कलाकारो के विशेष अभिनय से, कुछ बेहद विशेष संगीत से और कहीं कहीं अपनी असाधारण सिनेमेटोग्राफी से। हालांकि सेंसर बोर्ड के साथ हुये सारे विवाद के चलते आम दर्शको का ध्यान उन चीजों की तरफ ज्यादा आकृष्ट हो गया, जो की वस्तुतः सिनेमा हाल मे एक सरप्राइज़ के तौर पर मिलनी थी, या जिन का उपयोग प्रमोशन के दौरान दर्शको के मन मे जिज्ञासा उत्पन्न करने के लिए किया जाना था। हालांकि न्यायालय ने अपना फैसला भी दे दिया और सब पक्षो ने उसे मान भी लिया। लेकिन फिर भी बड़ी आसानी से समझा जा सकता है की कुछ जगहो पर उपयोग की गयी अश्लील शब्दावलियों से सहज ही बचा जा सकता था। कि...Read More

शोरगुल

कलाकार – जिम्मी शेरगिल, आशुतोष राणा, सुहा गोजेन, संजय सूरी, हितेन तेजवानी, एजाज खान निर्देशक – प्रणव कुमार सिंह, जितेंद्र तिवारी   पिछले हफ्ते रिलीज होने वाली यह फिल्म ऐन वक्त पर एक हफ्ते के लिए आगे इस वजह से टली कि यूपी के कई सिनेमाघरों ने फिल्म को अपने यहां लगाने से इनकार कर दिया था। कहा जा रहा था कि फिल्म में हिंदु-मुस्लिम दंगों के सीन की भरमार है और साथ कहानी के किरदारों का नाम यूपी सरकार के नेताओं से मिलते-जुलते हैं। इस फिल्म में प्रदेश के सीएम का नाम मिथिलेश आपको यूपी के सीएम की याद दिलाएगा तो फिल्म में होम मिनिस्टर बने आलम खान का नाम भी आपको यूपी के बड़े नेता की याद दिलाता है। ऐसा लगता है कि सेंसर बोर्ड इस बार फिल्म पर न जाने क्यों कुछ ज्यादा मेहरबान रहा तभी तो फिल्म में कई भड़काऊ संवादों को पास किया गया तो दंगों के कई सीन भयानक होने के बावजूद सेंसर ने पास किए। कहान...Read More

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