Author: Team Rangayan

सच्चाई की बरबादी में भी उम्मीद की एक किरण दिखाता नाटक ‘नायक’

पंजाब के जालंधर शहर में कई तरंह के नाटक पेश किए जा चुके हैं लेकिन अनानेमस थीएटर का हमेशा यहीं मानना रहा है कि नाटकों को अलग-अलग ढंग से पेश किया जाए। इस बार भी इस टीम ने पंजाब के मशहूर लेखक गुरशरन सिंह के पंजाबी नाटक ‘नायक’ का सफल मंचन किया। यह नाटक समाज में भ्रिषट और सिफारशों पर चलने वाले कलयुग भरे जीवन की सच्चाई ब्यान करता है जिस की  कैद में हद से ज्यादा लोग आ चुके हैं और इसी कारण ईमानदार इंसान क...Read More

‘अमृता’ की याद के दो साल – सुदीप सोहनी

अगस्त का महीना अमृता प्रीतम के जन्मदिन का महीना होता है। और इसी अगस्त महीने में आज ही के दिन हमने फैज़ाबाद से अपने नाटक ‘अमृता’ का सफ़र शुरू किया था। इन दो सालों में हमने फैज़ाबाद से लेकर नागपुर, जबलपुर, जयपुर, भोपाल, बीकानेर, अमृतसर, पटियाला, जालंधर, विदिशा कई शहरों में इसके मंचन किए। कोलकाता की बारी है अक्टूबर में। हर बार अमृता एक अलग तरह से हमसे मिलीं। आज मन भी भावुक है। सोचता हूँ कि क़...Read More

थिएटर ऑफ़ रेलेवेंस का दिल्ली नाट्योत्सव – मंजुल भारद्वाज

थिएटर ऑफ़ रेलेवेंस के दिल्ली नाट्योत्सव ने दर्शकों को झकझोरा और उसकी चेतना को नया सोच और नई दृष्टि दी। थिएटर ऑफ़ रेलेवेंस नाट्य दर्शन के सृजन और प्रयोग के 25 वर्ष पूरे हुए। अपने सृजन के समय से ही देश और विदेश, जहां भी इस नाट्य दर्शन की प्रस्तुति हुई, न सिर्फ दर्शकों के बीच अपनी उपादेयता साबित की, बल्कि रंगकर्मियों के बीच भी अपनी विलक्षणता स्थापित की। इन वर्षों में इस नाट्य दर्शन ने न सिर्फ नाट्य कला...Read More

इप्टा-अंक नाटय रंगोत्सव

इप्टा की इकाई इप्टा जयपुर की ओर से 8वां राष्ट्रीय इप्टा नाट्य रंगोत्सव 9 से 12 अगस्त रविन्द्र मंच सभागार में आयोजित किया जाएगा।  

रंगमंच पढऩे से ज्यादा करने की कला है : अनूप त्रिवेदी

नाटक की तरफ रुझान कैसे हुआ? मेरा गांव एटा जिले में था- पूरब में पटियाली, जहां अमीर खुसरो का जन्म हुआ और पश्चिम में सोरों, जहां तुलसीदास का जन्म हुआ। बचपन में सोचता था कलक्टर बन जाऊं तो लोग बड़ा आदमी मान लेंगे। फिर लगा नहीं कलाकार सबसे बड़ा होता है। उन्हीं दिनों टीवी पर अनुपम खेर का इंटरव्यू देखा जिसमें उन्होंने लखनऊ की भारतेंदु नाट्य अकादमी का जिक्र किया था। मैं अपने मित्र की मदद से वहां पहुंचा। व...Read More

एक म्यूज़िकल स्केच है – जग्गा जासूस

एक गाँव का ,लकड़ी से बने घर का हॉस्पिटल और हॉस्टल के बीच गुजरी दुनिया का जिसमे अपना वज़ूद तलाशता अधूरा बच्चा है बोलने वाली इस दुनिया में वो अधूरा है क्यूंकि दुनिया की तरह नहीं बोल पाता। हॉस्पिटल में दया से उपजे स्नेह की कमी नहीं है पर बचपन को बैठकर सुनने का वक़्त किसी के पास नहीं है इसलिए वे कहना छोड़ देता है सुनने का वक़्त सिर्फ अपनों के पास होता है। इत्तेफ़ाक़ का एक रेड सर्कल है ,एक दायरा जो उसके आस पा...Read More

नाटक बिदेसिया का एक किस्सा

1980 का दशक था। उस वक्त भिखारी ठाकुर लिखित और संजय उपाध्याय निर्देशित बिदेसिया नाटक तीन घंटे से ऊपर का हुआ करता था। 25 मिनट का तो पूर्व रंग हुआ करता था अर्थात् बिदेसी, बटोही, प्यारी सुंदरी और रखेलिन की कथा नाटक शुरू होने के 25 मिनट बाद ही शुरू हुआ करता था। अब तो पता नहीं कैसे यह भ्रम व्याप्त हो गया है कि डेढ़ घंटे से ज़्यादा का नाटक कोई देखना ही नहीं चाहता जबकि अभी भी कई शानदार नाटक ऐसे हैं जिनकी अव...Read More

संपूर्णता की तलाश में उलझी अधूरी दास्तान – आधे-अधूरे

नाटक – आधे-अधूरे लेखन – मोहन राकेश निर्देशन – साबिर खान रवींद्र मंच, जयपुर रवींद्रमंच पर ज्योति कला संस्थान की ओर से वरिष्ठ रंगकर्मी सुरेश सिंधु के संयोजन में आयोजित एस. वासुदेव सिंह स्मृति नाट्य समारोह के अंतिम दिन गुरुवार को मोहन राकेश की चर्चित नाट्य कृति ‘आधे-अधूरे’ का मंचन किया गया। सार्थक नाट्य संस्था के रंगकर्मियों की इस प्रस्तुति का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी सा...Read More

रंग कर्मियों के जत्थे उदास हैं

रंगकर्मी, निर्देशक और कवि अलखनंदन के निधन के पश्चात उनके संबंध में विख्यात साहित्यकार ज्ञानरंजन ने एक महत्वपूर्ण संस्मरण आलेख लिखा था। यह आलेख नागपुर से प्रकाशित लोकमत में 26 फरवरी 2012 को प्रकाशित हुआ था। – अंश पायन सिन्हा के फेसबुक टाइमलाइन  से… रंगकर्मी, निर्देशक और कवि अलखनंदन ने चार दशकों तक निरंतर रंगकर्म करते हुए अनेक बेजोड़ नाटकों की प्रस्तुतियाँ देश भर में की हैं। उन्हें संगीत...Read More

मानवीय विष को निष्क्रिय करना ही कला का मकसद और साध्य है ! – मंजुल भारद्वाज

नाटक “अनहद नाद – Unheard Sounds of Universe” नाटक होते हुए भी “जीवन” है और जीवन में घटित “नाटक” को हर पल उखाड़ फैंकता है .. कलाकार की कला , कलात्मकता और कला सत्व है ..उनका सृजन नाद है .. व्यक्तिगत सृजन दायरे को तोड़कर उसे यूनिवर्सल , ब्रह्मांडीय सृजन से जोड़ता है और कलाकार को देश , काल ,भाषा , धर्म से उन्मुक्त कर एक सृजनकार , एक क्रिएटर के रूप में घडता है . “अनहद नाद – Unheard sounds of U...Read More

मुकाम पोस्ट डेरू जिला नागौर

जेकेके में खेला गया हिटलर की फंतासी पर आधारित नाटक ग्राम डेरू में हिटलर का प्लेन गिरने से उथल-पुथल मंच से जैसे ही पर्दा उठता है सबसे पहले दिखाई देता है दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह एडॉल्फ हिटलर का ऑफिस। हिटलर की कुर्सी खाली है, उसके पास खड़ा है हिटलर का सहायक गोबेल्स। तभी हिटलर का प्रवेश होता है। वो जर्मन भाषा में गोबेल्स को कुछ निर्देश देता है जिसका जवाब भी गोबेल्स जर्मन में ही देता है। तभी मंच पा...Read More

इप्टा का 14वां राष्ट्रीय अधिवेशन एवं जन सांस्कृतिक महोत्सव 2 अक्टूबर से इंदौर में

भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) का 14 वां राष्ट्रीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय जन सांस्कृतिक महोत्सव का उद्घाटन कल स्थानीय आनंदमोहन माथुर सभागृह में होगा। उद्घाटन सत्र की शुरूआत प्रातः 10 बजे से सुप्रसिद्ध फिल्मकार एवं इप्टा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री एम.एस. सथ्यू के उद्घाटन वक्तव्य से होगी। जन संस्कृति महोत्सव का उद्घाटन फिल्मकार आनंद पटवर्धन करेंगे। इस अवसर पर देश-विदेश के अन्य समानधर्मा संगठनों के प्रत...Read More

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