Author: दलीप वैरागी

थिएटर ज़िंदगी के लिए उतना ही ज़रूरी है जितना मॉर्निंग वॉक या वर्जिश

किशोर–किशोरियों के साथ अकसर जीवन कौशल के मुद्दों पर काम करने के मौके मिलते रहते हैं। उनके साथ जिन बुनियादी कौशलों पर काम किया जाता है उनमे से एक है – सम्प्रेषण का कौशल। ये ऐसा कौशल है जिसको साधने से इंसान के सब सामाजिक रिश्ते सध जाते हैं। पर ये कौशल आसानी से सधता नहीं है। प्रशिक्षणों में किशोरों के साथ इस कौशल पर काम करते तो हैं लेकिन दिल को संतुष्टि नहीं होती। कम्यूनिकेशन की जो गतिविधियां अकसर की...Read More

नाटक और रटना

शिक्षा में अवधारणाओं को रट लेना एक अच्छी शैक्षिक प्रक्रिया नहीं मानी जाती है, लेकिन फिर भी यह प्रायः कहीं न कहीं  प्रतिष्ठित हो जाती है। यह शिक्षा में कितना जरुरी है या मज़बूरी है, इस मुद्दे पर बहस भी वर्तमान है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति रंगमंच पर भी है। नाट्य मंडलियों में प्रायः दो-चार ऐसे अभिनेता होते हैं जो दूसरी या तीसरी रिहर्सल तक लाइनों को रट लेते हैं। यहाँ मैं इसके लिए संवाद शब्द जानबूझकर नहीं ब...Read More

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