Author: कुश

रंगमंच का प्यादा

बैकग्राउंड में बांसुरी का संगीत बज रहा है.. स्टेज पर एक आराम कुर्सी पड़ी है.. जिसकी कोई आवश्यकता ही नहीं बची है.. सब लोग व्यस्त है.. परदे पर आसमान भी बनाया हुआ है.. मगर उसमे अभी रात है.. आठ दस तारे बने हुए है परदे पर.. और कोने में एक चाँद पड़ा ऊंघ रहा है.. सामने दर्शक है. जो ताली बजाने से लेकर उबासी लेने तक का काम कुशलता से अंजाम दे सकते है.. “ये कैसी विडम्बना है कि जब मैं गलत था तो सब मेरे साथ थे...Read More

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