Share This Post

संपूर्णता की तलाश में उलझी अधूरी दास्तान – आधे-अधूरे

संपूर्णता की तलाश में उलझी अधूरी दास्तान – आधे-अधूरे

नाटक – आधे-अधूरे
लेखन – मोहन राकेश
निर्देशन – साबिर खान
रवींद्र मंच, जयपुर

रवींद्रमंच पर ज्योति कला संस्थान की ओर से वरिष्ठ रंगकर्मी सुरेश सिंधु के संयोजन में आयोजित एस. वासुदेव सिंह स्मृति नाट्य समारोह के अंतिम दिन गुरुवार को मोहन राकेश की चर्चित नाट्य कृति ‘आधे-अधूरे’ का मंचन किया गया। सार्थक नाट्य संस्था के रंगकर्मियों की इस प्रस्तुति का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी साबिर खान ने किया। ‘आधे-अधूरे’ पिछले कुछ समय से जयपुर थिएटर में निरंतर खेला जा रहा है।

इस नाटक में मध्यवर्गीय परिवार की कहानी है जिसमें परिवार का मुखिया जो काम हाथ में लेता है वह असफल रहने पर घर में सारा दिन बेकार बैठकर कभी अखबार तो कभी आसपास मोहल्ले में घूमता रहता है। उसकी पत्नी परिवार का पेट पालने के लिए नौकरी करती है और सायं को जब घर वापस आती है तो घर में यहां वहां सामान बिखरा देखकर पति व बच्चों को डांटती है तो कोई उसकी बात को तवज्जों नहीं देता है। घर में रहने वाले परिवार के लोगों के विचार एक दूसरे से नहीं मिलने से अकसर घर में झगड़ा होता है। पति पत्नी में आपस में विचार न मिलने से उनकी संतान भी अपने मन के अनुसार काम करती है। संतान सोचती हे कि मां जो उनके लिए कर रही है उसके पीछे कोई ओर मतलब है। पति भी मौका मिलने पर अपनी पत्नी को ताने मारने से बाज नहीं आता है।

परिवार का बड़ा बेटा अशोक बीच में पढ़ाई छोड़ देता है और कहीं छोटी मोटी नौकरी नहीं करना चाहता है। दिन भर घर में बेकार रहना उसे अच्छा लगता है अगर मां उसे कहीं नौकरी लगवाने के लिए अपने आफिस के बॉस से बात करती है तो उसे क्रोध में आकर इंकार कर देता है। वहीं बड़ी बेटी मनू अपनी मर्जी से घर से भाग कर शादी कर लेती है लेकिन वहां भी उसकी पति से नहीं बन पाती है। वह अपने पति के घर से मां के पास आती है तो उसके चेहरे के उड़े रंग को देखकर न तो पिता उसे पूछने की हिम्मत रखता है और न ही मां। लेकिन बातों में लगाकर इस बात का पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि क्या कारण है जो इतनी परेशान है।

निर्देशक साबिर खान ने इस बार यह नाटक अनुभवी कलाकारों की टीम के साथ किया जिसमें एनएसडी पास आउट सुनीता तिवारी नागपाल, वरिष्ठ अदाकारा नाट्य निर्देशक रुचि भार्गव और साहिल आहूजा का अभिनय केंद्र में था। साहिल ने इस नाटक के सभी पांच पुरुष पात्रों का अभिनय किया। एक अन्य भूमिका में सौम्या होलानी ने भी अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अनुरंजन शर्मा और आयुषी दीक्षित ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया।

Lost Password

Register