रंगायन | Rangayan

अभी-अभी

सिनेमा

अब्बास किरोस्तामी का सिनेमा

मशहूर ईरानी फिल्मकार अब्बास किरोस्तामी का पिछली चार जुलाई को निधन हो गया। उन्हें ईरानी सिनेमा का सत्यजीत रे कहा जाता है। उनकी फिल्म-यात्रा को याद कर रहे हैं अजि...

फिल्म समीक्षा – उड़ता पंजाब

तमाम विवादो के बाद रिलीज होने वाली ‘उड़ता पंजाब’ को सीधे सीधे ‘शंघाई’ और ‘ओह माय गॉड’ की श्रेणी मे रखा जा सकता है, ट्रीटमेंट ...

विविध

इतालवी नाटककार दारियो फो का जाना

दारियो फ़ो ने 13 अक्टूबर को 90 वर्ष की उम्र में हमें अलविदा कह दिया। एक नाटककार के साथ-साथ वे एक अभिनेता, गायक, लेखक, बुद्धिजीवी, राजनीतिक एक्टिविस्ट, फ़ासीवाद-वि...

हिमानी शिवपुरी : ऐसा नाम जिसने देखा हिंदी सिनेमा का बदलता हुआ दौर

हिमानी शिवपुरी को हाल ही में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मन से कलाकार हिमानी के लिए यह भावपूर्ण क्षण था जब माननीय राष्ट्रपति ने उनको इस ...

रंगमंच का प्यादा

बैकग्राउंड में बांसुरी का संगीत बज रहा है.. स्टेज पर एक आराम कुर्सी पड़ी है.. जिसकी कोई आवश्यकता ही नहीं बची है.. सब लोग व्यस्त है.. परदे पर आसमान भी बनाया हुआ ...

प्रेम कहानी एक कवयित्री और चित्रकार की

भारत की लोकप्रिय कवयित्रियों में से एक अमृता प्रीतम ने एक बार लिखा था – “मैं सारी ज़िंदगी जो भी सोचती और लिखती रही, वो सब देवताओं को जगाने की कोशिश ...

एक थे परसाई

उनसे यूँ तो ‘फेस टू फेस’ कभी मिलना नही हुआ। बस किताबों और अखबारों के मार्फ़त ही उनसे मुलाकात थी। उन्हें हाईस्कूल के दिनों में पहली बार पढ़ा तो लगा ब...

मैं वो नहीं जो दिखता हूँ, मैं वो हूँ जो लिखता हूँ – मानव कौल

‘मेरा कोई स्वार्थ नहीं, न किसी से बैर, न मित्रता। मैं हूं जैसे- चौराहे के किनारे पेड़ के तने से उदासीन वैज्ञानिक सा लेटर-बाॅक्स लटका।’ यह परिचय ‘मौन में बा...

स्मृतिशेषः पणिक्कर का जाना

जयदेव तनेजाः हाल में मलयालम/ भारतीय रंगमंच के एक महत्त्वपूर्ण शिखर-पुरुष कावलम नारायण पणिक्कर के निधन की सूचना तक देना हिंदी/ राष्ट्रीय मीडिया ने जरूरी नहीं समझ...

अब्बास किरोस्तामी का सिनेमा

मशहूर ईरानी फिल्मकार अब्बास किरोस्तामी का पिछली चार जुलाई को निधन हो गया। उन्हें ईरानी सिनेमा का सत्यजीत रे कहा जाता है। उनकी फिल्म-यात्रा को याद कर रहे हैं अजि...

शिवमूर्ति: वंचितों की पीड़ा का किस्सागो

कथा साहित्य में एक आश्चर्य की तरह हैं शिवमूर्ति. आलोचक और संपादक लगभग आरोप की तरह कहते हैं कि इतना कम लिखकर इतनी अधिक ख्याति! पाठकों के बीच ऐसा अपनापा कितनों को...

मोहन राकेश

मोहन राकेश (8 जनवरी 1925 – 3 जनवरी, 1972) नई कहानी आन्दोलन के सशक्त हस्ताक्षर थे। पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए किया। जीविकोपार्जन क...

हमारे अनुभव से ही बनता है नाटक

अरविंद गौड़ से आशीष कुमार ‘अंशु’ की बातचीत हिन्दी थिएटर में रूचि रखने वालों के लिए अरविन्द गौड़ का नाम जाना पहचाना है. तुगलक (गिरिश कर्नाड), कोर्ट मार्शल (स्वदेश...

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